Monday, 27 December 2021

Pista meena kabbadi sports Girl

  Name - pista meena
  District- Bundi
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 पिस्ता मीणा को न्याय दो । बहन पिस्ता मीणा बूंदी जिला की रहने वाली है। कब्बड़ी खिलाड़ी पिस्ता मीणा के साथ अन्याय हुआ है। पिस्ता मीणा को नेशनल लेवल पर खेलना चाहिए परंतु कुछ लोगो की वजह से उनका नाम टीम की लिस्ट से बाहर कर दिया गया है । उन्होंने जब आबाज उठाई तो उनको डराया धमकाया जा रहा है । उनके साथ अन्याय हो रहा है। पिस्ता मीणा ने बताया है की जब उनके मैच चल रहे थे तो उनकी साथ 3 लड़किया थी जिनमे एक लड़की साक्षी भी थी बो अतिरिक्त में अपना स्थान लिए हुए थी परंतु मैच के बाद सेलेक्टर ने उनका नाम तो  परंतु लिस्ट से गायब कर दिया  जब उन्होंने शिकायत की तो उनको धमकियां मिलने लगी । अब हम सब मिलके बहन को न्याय दिलाएंगे ।।।।।।।।।।।।।।।


  बूंदी जिले की कब्बड़ी की प्रतिभावान खिलाड़ी पिस्ता मीणा (डोला की खजुरी) के साथ राजस्थान खेल विभाग के अधिकारियों व स्थानीय जिला प्रशासन द्वारा भेदभाव का रवैया निंदनीय है। आप स्वयं देख लीजिए पिस्ता मीणा का खेल टीम में रेड देने भी वही जा रही है और कैचर भी वही है फिर चयनकर्ताओं ने मिलीभगत से या यूं कहिए राजनेतिक दबाव से पिस्ता मीणा का चयन राष्ट्रीय स्तर पर नही किया
 ....आप खुद खिलाड़ी हो

 #पिस्ता_को_न्याय_दो


Sunday, 26 December 2021

Child labour बालश्रम

Child labour– बालश्रम 
बालश्रम =  बचपन में कार्य

बालश्रम क्या है
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अगर व्यावसायिक उद्देश्य से किए जा रहे किसी कार्य के लिए 14 साल से कम उम्र के बच्चे को नियुक्त किया जाता है तो वह बाल श्रम कहलाता है। इसे भारत में गैर कानूनी करार दिया गया है। भारत के संविधान में मूल अधिकारों के अनुच्छेद 24 के तहत भारत में बाल श्रम पर पाबंदी लगाई गई है।
बालश्रम के कारण
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यूनीसेफ के अनुसार बच्चों का नियोजन इसलिए किया जाता है, क्योंकि उनका आसानी से शोषण किया जा सकता है। बच्चे अपनी उम्र के अनुरूप कठिन काम जिन कारणों से करते हैं, उनमें आम तौर पर गरीबी पहला है। लेकिन इसके बावजूद जनसंख्या विस्फोट, सस्ता श्रम, उपलब्ध कानूनों का लागू नहीं होना, बच्चों को स्कूल भेजने के प्रति अनिच्छुक माता-पिता (वे अपने बच्चों को स्कूल की बजाय काम पर भेजने के इच्छुक होते हैं, ताकि परिवार की आय बढ़ सके) जैसे अन्य कारण भी हैं। और यदि एक परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र आधार ही बाल श्रम हो, तो कोई कर भी क्या सकता है।

 बालश्रम करवाने पर सजा

यदि कोई व्यक्ति या संस्था 14 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी कार्य पर लगाता है तो ऐसा करने पर उसे दो साल तक की कैद की सजा या जुर्माना या सजा और अधिकतम 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यह कानून 14 से 18 साल तक की उम्र के किशोरों को खान के साथ ही अन्य ज्वलनशील पदार्थ या विस्फोटकों जैसे जोखिम वाले कार्यों में रोजगार पर लगाने पर भी दिए जाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि यह कानून फिल्मों, विज्ञापनों और टीवी उद्योग में बच्चों के काम करने पर लागू नहीं होता।

क्या अभिभावक माता पिता को बालश्रम करने की अनुमति देने पर दंडित किया जा सकता है ।
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क्या माता-पिता/अभिभावकों को अपने बच्चों को काम करने की अनुमति देने के लिए दंडित किया जा सकता है?

सामान्यतः बच्चों के माता-पिता /अभिभावकों को अपने बच्चों को इस कानून के विरुद्ध काम करने की अनुमति देने के लिए सज़ा नहीं दी जा सकती है परन्तु यदि किसी 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे को व्यावसायिक उद्देश्य से काम करवाया जाता है या फिर किसी 14– 18 वर्ष की आयु के बच्चे को किसी खतरनाक व्यवसाय या प्रक्रिया में काम करवाया जाता है तो यह प्रतिरक्षा लागू नहीं होती और उन्हें सज़ा दी जा सकती है l क़ानून उन्हें अपनी भूल सुधारने का एक अवसर देता है, यदि वह ऐसा करते हुए पहली बार पकड़े जाते हैं तो वह इसे समाधान/समझौते की प्रक्रिया से निपटा सकते हैं, पर यदि वह फिर से अपने बच्चे को इस क़ानून का उल्लंघन करते हुए काम करवाते हैं तो उन्हें 10,000 रूपए तक का जुर्माना हो सकता है l



Friday, 24 December 2021

The cycle girl - Aarti prajapat

जयपुर – The cycle girl = Aarti prajapat

आरती प्रजापत उम्र 17 साल  ने एक दिन में साइकिल से  उन्होंने जयपुर  से भरतपुर 216 किलोमीटर की दूरी  अकेले ही तय करके अपनी मंजिल पर पहुंच कर मिसाल कायम की है। इस सफर मे उसके साथ  उसका हौसला उसके साथ था। आरती  की दादी की तबीयत खराब थी। आरती ने दादी से मिलने के लिए मां से जिद की, मां ने कहा कि कुछ दिन बाद सभी दादा दादी के पास गांव चलेंगे। इससे पहले ही आरती साइकिल से अकेली भरतपुर के लिए रवाना हो गई। वह 13 अक्टूबर को जयपुर से सुबह 4.30 बजे निकली थी, शाम 7 बजे तक भरतपुर पहुंच गई थी।

रास्ते की अड़चने

इरादो से मजबूत आरती अपनी मंजिल की ओर बड़ रही थी। उसे रास्ते में कुछ छोटी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। उसे एक जगह रास्ता भटकने का का भी सामना करना पड़ा। आरती रास्ते में भरतपुर से आगे निकल गई । उसने रास्ते में एक बोर्ड पर देखा कि बहा से फतेहपुर सीकरी  15 किलोमीटर दूर है तब बह  वापस सही रास्ता पकड़ कर वापस दादा दादी के घर पहुंची ।

कितने किलोमीटर करती हैं रोजाना प्रैक्टिस

आरती प्रजापत जिसकी उम्र भले ही 17 साल की है पर उसकी हिम्मत को हम नमन करते है आरती के पिता जयपुर में   किराना की दुकान चलते है।  आरती रोजाना तक़रीबन 50 किलोमीटर साइकिल  चलाती हैं 

भारत पाकिस्तान के मध्य युद्ध

 भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध होना किसी भी रूप में सही विकल्प नहीं है। दोनों देश परमाणु शक्ति संपन्न हैं, और युद्ध की स्थिति में इसका प्रभ...